सांस्कृतिक पर्यटन

नागालैंड के त्योहार: त्योहारों की भूमि

नागालैंड को प्रसिद्ध रूप से ‘त्योहारों की भूमि’ (The Land of Festivals) कहा जाता है। किफिरे जिले में विभिन्न जनजातियाँ अपने अनूठे त्योहार मनाती हैं, जो उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को दर्शाते हैं।

1. मोंगमोंग (Mongmong) — संगतम जनजाति

    • संगतम जनजाति किफिरे की प्रमुख जनजातियों में से एक है और इसके लोग 12 त्योहार मनाते हैं, जिनमें मोंगमोंग सबसे महत्वपूर्ण है।

    • मोंगमोंग का अर्थ ‘हमेशा साथ रहना’ है।

    • यह छह दिनों तक चलने वाला त्योहार है, जो प्रत्येक वर्ष 1 से 6 सितंबर तक मनाया जाता है।

    • यह त्योहार फसल कटाई और समृद्धि के लिए सर्वोच्च देवता लिजाबा (Lijaba) से प्रार्थना करने पर केंद्रित है।

मोंगमोंग के छह दिन

    • दिन 1 — जांगसिका (Jangsika): तैयारी का दिन, जब गाँव के लोग पशुओं का वध करते हैं और आवश्यक वस्तुओं का भंडार तैयार करते हैं।

    • दिन 2 — सिंगकिथ्सा (Singkithsa): धार्मिक प्रतिबंधों का दिन। गाँव की सबसे बुजुर्ग महिला द्वारा सबसे पहले पानी निकालने के बाद ही अन्य लोग पानी ला सकते हैं।

    • दिन 3 — मुसुयांगटुप (Müsüyangtüp): अनुष्ठान का दिन, जब सबसे बुजुर्ग महिला भोजन बाँटने से पहले चूल्हे के तीन पत्थरों को भोजन अर्पित करती है।

    • दिन 4 — किखालांगपी (Kikhalangpi): सामुदायिक श्रम के माध्यम से जलस्रोतों तक जाने वाले रास्तों की सफाई की जाती है। इसके बाद सामूहिक भोज, लोकगीत और पारंपरिक खेल आयोजित होते हैं।

    • दिन 5 — अचांगका सिंगकिथ्सा (Achangka Singkithsa): बीमारी को दूर रखने के लिए रास्तों के चौराहों पर पेड़ों की शाखाएँ लगाई जाती हैं। यह त्योहार के समापन का प्रतीक है।

    • दिन 6 — थ्रोंगबा (Throngba): बुरी आत्माओं और बीमारियों को दूर भगाने के प्रतीक के रूप में घरों पर बिच्छू-बूटी (Nettle) की पत्तियाँ लगाई जाती हैं।

2. तुलुनी (Tuluni) — सुमी जनजाति

    • तुलुनी, जिसे अन्नी (Anni) भी कहा जाता है, जुलाई के मध्य में मनाया जाता है।

    • यह त्योहार भरपूर फसल और समृद्धि का प्रतीक है।

    • इसका नाम पारंपरिक चावल से बनी शराब ‘तुलुनी’ के नाम पर पड़ा है, जिसे केले के पत्तों से बने प्यालों में परोसा जाता है।

प्रमुख परंपराएँ

    • उपहारों का आदान-प्रदान: विवाह के लिए वचनबद्ध जोड़े भोजन और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। भावी ससुराल वालों के लिए विशेष भोज आयोजित किए जाते हैं।

    • सामुदायिक सहयोग: खेती करने वाले लोग 20–30 सदस्यों के कार्य समूहों में पशुओं के मांस को आपस में बाँटते हैं।

    • सामाजिक मेल-जोल: यह सभी लोगों के लिए आनंद और एकता का अवसर होता है। इस दौरान बच्चों की देखभाल करने वालों और नए सदस्यों सहित सभी लोग लोकगीतों और पारंपरिक गीतों में भाग लेते हैं।

3. अहुना (Ahuna) — सुमी जनजाति

    • अहुना सुमी जनजाति का पारंपरिक फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला त्योहार है।

    • हाल के समय में इसने सुमी जनजाति के आधिकारिक जनजातीय त्योहार के रूप में तुलुनी का स्थान लिया है।

    • यह कृतज्ञता व्यक्त करने और अच्छे भाग्य की कामना करने का प्रतीक है।

अहुना की प्रमुख विशेषता नई फसल के चावल से पहला भोजन तैयार करना है। इसे पारंपरिक संसाधनों का उपयोग करके बाँस के खोखले खंडों के अंदर पकाया जाता है।

4. मेटेमनियो (Metemneo) — यिमचुंगर जनजाति

    • यिमचुंगर जनजाति मेटेमनियो त्योहार अगस्त के दूसरे सप्ताह में मनाती है।

    • यह त्योहार बाजरे की फसल कटाई के बाद आयोजित किया जाता है।

    • यह पाँच दिनों तक चलने वाला त्योहार है, जिसके दो प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख परंपराएँ

    • कृषि के प्रति श्रद्धा: कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की जाती है।

    • आध्यात्मिक और सामाजिक संबंध: दिवंगत लोगों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है तथा युवा जोड़ों की सगाई से संबंधित परंपराएँ निभाई जाती हैं।