जिले के अधिकांश लोग ग्रामीण गाँवों में रहते हैं, इसलिए कृषि यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय है। खेती की प्रमुख पद्धति झूम खेती है, जिसे स्थानांतरित खेती या जंगलों को काटकर और जलाकर की जाने वाली खेती भी कहा जाता है। झूम खेती में मुख्य रूप से पारंपरिक फसलें उगाई जाती हैं, जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में धान, मक्का, बाजरा, जॉब्स टीयर्स (एक प्रकार का अनाज) और विभिन्न प्रकार की फलियाँ। कृषि विभाग के प्रोत्साहन से किसान धीरे-धीरे आलू जैसी नकदी फसलों की खेती भी करने लगे हैं। इसके अतिरिक्त, सोयाबीन और ‘खोलार’ (Kholar — Phaseolus प्रजाति की स्थानीय फलियाँ) जैसी पारंपरिक फसलें भी पुराने तरीकों से नकदी फसलों के रूप में उगाई जाती हैं। अनुकूल भूभाग वाले क्षेत्रों में किसान सीढ़ीदार खेतों में स्थायी धान की खेती भी अपना रहे हैं। जिले की सामान्य जलवायु बागवानी के लिए भी अनुकूल है। सरामती पर्वत की तलहटी जैसे ठंडे क्षेत्रों में सेब की खेती बहुतायत में की जाती है। इसी कारण म्यांमार की सीमा से लगे सीमावर्ती गाँव थानामिर (Thanamir) में प्रतिवर्ष ‘एप्पल फेस्टिवल’ (सेब महोत्सव) आयोजित किया जाता है। इसके अलावा, संतरा, आम, अमरूद और केले जैसे फल भी यहाँ प्रचुर मात्रा में उगाए जाते हैं।