जिले के बारे में

म्यांमार की सीमा से लगे राज्य के सबसे पूर्वी भाग में स्थित किफिरे जिला (Kiphire District) का कुल क्षेत्रफल 1,255 वर्ग किलोमीटर है। यह राज्य की राजधानी कोहिमा से 254 किलोमीटर दूर है। राज्य के सबसे ऊँचे पर्वत सरामती और जिंगखू पर्वतों के बीच स्थित किफिरे समुद्र तल से 896.42 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ की जलवायु सामान्यतः गर्मियों में गर्म और आर्द्र तथा सर्दियों में ठंडी रहती है। सर्दियों में तापमान न्यूनतम 2.7°C तक पहुँच जाता है, जबकि गर्मियों में अधिकतम तापमान 37.0°C तक पहुँचता है। मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है और कभी-कभी अक्टूबर तक भी जारी रहता है। पिछले तीन वर्षों में औसत वार्षिक वर्षा 876 मिलीमीटर रही है। किफिरे की मूल आबादी बहुजातीय है। यहाँ आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त तीन जनजातियाँ हैं—संगतम (Sangtam), यिमचुंगरू (Yimchungrü) और सुमी (Sümi)। इनके अलावा कई उप-जनजातियाँ भी हैं, जो विभिन्न भाषाएँ बोलती हैं। अन्य नागा समुदायों की तरह, इन सभी जातीय समूहों की अपनी विशिष्ट भाषाएँ हैं। कई पीढ़ियों से एक साथ रहने के कारण ये विभिन्न जातीय और भाषाई समूह एक-दूसरे की भाषाओं को समझते हैं और अक्सर बातचीत में एक-दूसरे की भाषाओं का उपयोग करते हैं। हालाँकि जिले की विभिन्न जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हैं, फिर भी उनका सामाजिक ढाँचा काफी हद तक समान है। यहाँ के अधिकांश लोग ईसाई धर्म को मानते हैं। जिले में कैथोलिक और बैपटिस्ट चर्चों की मजबूत उपस्थिति है। इसके बावजूद, पारंपरिक त्योहार आज भी मनाए जाते हैं, जिनमें ईसाई परंपराओं का भी प्रभाव दिखाई देता है। जिले के प्रमुख त्योहार हैं—संगतम जनजाति का मोंगमोंग (Mongmong), जो सितंबर में मनाया जाता है; यिमचुंगरू जनजाति का मेटुमनियो (Metümnio), जो अगस्त में मनाया जाता है; और सुमी जनजाति का तुलुनी (Tuluni), जो जुलाई में मनाया जाता है। तीनों जनजातीय समुदायों के जुन्बोटो (Zunheboto) और तुएनसांग (Tuensang) जिलों के अपने संबंधित समुदायों के साथ घनिष्ठ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। किफिरे और तुएनसांग जिलों की संगतम तथा यिमचुंगरू जनजातियों का इतिहास और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। इसी प्रकार, किफिरे जिले के सुमी समुदाय के जुन्बोटो जिले के सुमी समुदाय के साथ भी समान सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। जिले के अधिकांश लोग ग्रामीण गाँवों में रहते हैं, इसलिए कृषि यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय है। खेती की प्रमुख पारंपरिक पद्धति झूम खेती है, जिसे स्थानांतरित खेती या जंगल को काटकर और जलाकर की जाने वाली खेती भी कहा जाता है। झूम खेती में मुख्य रूप से पारंपरिक फसलें उगाई जाती हैं, जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में धान, मक्का, बाजरा, जॉब्स टीयर्स (एक प्रकार का अनाज) और विभिन्न प्रकार की फलियाँ। कृषि विभाग के प्रोत्साहन से किसान धीरे-धीरे आलू जैसी नकदी फसलों की खेती भी अपना रहे हैं। इसके अलावा, सोयाबीन और स्थानीय किस्म की ‘खोलार’ (Kholar — Phaseolus प्रजाति) फलियाँ भी पारंपरिक तरीकों से नकदी फसल के रूप में उगाई जाती हैं। अनुकूल भूभाग वाले क्षेत्रों में किसान सीढ़ीदार खेतों में स्थायी धान की खेती भी करने लगे हैं। जिले की सामान्य जलवायु बागवानी के लिए भी अनुकूल है। सरामती पर्वत की तलहटी जैसे ठंडे क्षेत्रों में सेब बहुतायत में उगाए जाते हैं। इसी कारण म्यांमार की सीमा से लगे सीमावर्ती गाँव थानामिर (Thanamir) में प्रतिवर्ष ‘एप्पल फेस्टिवल’ (सेब महोत्सव) आयोजित किया जाता है। संतरा, आम, अमरूद और केला जैसे अन्य फल भी यहाँ प्रचुर मात्रा में उगाए जाते हैं। किफिरे राज्य के उन क्षेत्रों में से एक है, जहाँ भू-आकृतिक विशेषताएँ अत्यंत रोचक हैं। यहाँ अनेक प्राकृतिक स्थल हैं, जैसे सरामती पर्वत की चोटी, खोंगजिरी की पत्थर की गुफा तथा मिमी और सलोमी गाँव, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जुंगकी, तिजू और लिखिमरो नदियों की यात्राएँ, पोखफुर और आसपास के क्षेत्रों में खनन स्थल, फाकिम वन्यजीव अभयारण्य, मिमी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र और लिखिमरो जलविद्युत परियोजना भी प्रकृति प्रेमियों तथा बाहरी गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। फुवकिउ, मिमी, पोंग्रेन, फेलुंगरे और पुंगरो गाँवों में पत्थर की पट्टियों से बनी छतों वाले कई पारंपरिक घर देखने को मिलते हैं। ऐसे घर राज्य के अन्य हिस्सों में बहुत कम दिखाई देते हैं। सरामती और जिंगखू पर्वतों में विभिन्न प्रकार के ऑर्किड भी पाए जाते हैं, जिनमें नीले और लाल वांडा तथा सफेद, लाल और पीले रोडोडेंड्रोन शामिल हैं। ये फूल राज्य के अन्य क्षेत्रों में सामान्य रूप से नहीं पाए जाते। फाकिम वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले प्रमुख वन्यजीवों में ब्लाइथ्स ट्रैगोपैन (Blyth’s Tragopan), हॉर्नबिल और पहाड़ी मोर शामिल हैं। ये वन्यजीव किफिरे जिले की प्राकृतिक विविधता और जैविक संपदा को विशेष पहचान प्रदान करते हैं।